‘रंजिश ही सही’रिव्यू : इमोशनल कर जाती है यह प्रेम कहानी

मुझे फिल्मों पर फिल्में बनने देखना बेहद पसंद है। अबतक मैंने जब से होश संभाला है और फिल्मों को लेकर रुचि हुई है, फिल्मों पर बनी लगभग हिंदी फिल्में देखती रही हूँ। फिर चाहे वह ‘प्यासा’ हो या ‘डर्टी पिक्चर’ और पूरी यकीन के साथ बता रही हूँ फिल्मों पर फिल्में बनना एक अलग ही स्वप्नीली दुनिया हो जाती है। वजह यह है कि मेरे जैसे उन तमाम दर्शकों को जिन्हें सिनेमा की जादूई दुनिया में रूचि है, उन्हें वैसे पहलुओं के बारे में भी जानने का मौका मिलता है, जिनके बारे में पहले से जानकारी नहीं होती है। ‘रंजिश ही सही’ को लेकर मेरी जो उत्सुकता थी, वह इन्हीं कारणों से रही। वैसे तो मैंने महेश भट्ट और परबीन बॉबी की प्रेम कहानी पर आधारित पहले भी फिल्में देखी हैं, लेकिन इन प्रेम कहानियों की यही तो खूबी है कि हर निर्देशक इसमें एक नया नजरिया जोड़ते जाते हैं।  इस बार निर्देशक पुष्पराज ने ‘रंजिश ही सही ‘ वेब सीरीज लेकर आये हैं और वे इस कहानी को क्या नया नजरिया देते हैं, उसके बारे में विस्तार से बताती हूँ।

क्या है कहानी

हिंदी फिल्मों और उसकी दुनिया को लेकर एक अलग फैंटेसी रही है। हर दशक में निर्देशक और अभिनेत्रियों की प्रेम कहानियां और प्रसंग के किस्से भी रहे हैं। कुछ ऐसे ही प्रसंगों में से एक रहा है मशहूर निर्देशक महेश भट्ट और अभिनेत्री परवीन बॉबी की लव स्टोरी, जिसका कुछ संदर्भ ‘वो लम्हे ‘ फिल्म में नजर आये। एक बार फिर से निर्देशक पुष्पराज ‘रंजिश ही सही’ लेकर आये हैं। इन आठ एपिसोड्स की इस सीरीज में एक निर्देशक और अभिनेत्री की ही प्रेम कहानी दर्शाई गई है।  शंकर( ताहिर राज भसीन) एक निर्देशक हैं, लेकिन उन्हें फिल्में बनाने में सफलता अब तक नहीं मिली है। आमना परवेज( अमला पॉल) एक बेहतरीन एक्ट्रेस हैं। इस अभिनेत्री के साथ काम करने के लिए हर निर्देशक कुछ भी करने को तैयार है। दूसरी तरह शंकर की पत्नी अंजू (अमृता पुरी) हैं। लेकिन अंजू का शंकर की जिंदगी में बहुत दखल नहीं है। निर्देशक शंकर तंगी की हालत में है और ऐसे में परिस्तिथियाँ ऐसी होती हैं कि आमना और शंकर एक दूसरे से मिलते हैं। लेकिन इसके बाद शंकर की जिंदगी में क्या तब्दीलियां आती हैं। अंजू के साथ उसके रिश्ते बरक़रार रह पाते हैं या नहीं। इन सारे सवालों के जवाब आठ एपिसोड्स में मिल जाते हैं।

बातें जो मुझे इस कहानी में अच्छी लगी

बैकड्रॉप और मेकिंग

कम निर्देशक ही गुजरे जमाने पर कोई फिल्म या सीरीज बनाते हैं तो फिल्म के बैकड्रॉप और उसकी मेकिंग के साथ न्याय कर पाते हैं। इस सीरीज के निर्देशक ने उस लिहाज से मुझे प्रभावित किया है। उन्होंने प्रॉप्स से लेकर, माहौल, म्यूजिक, कॉस्ट्यूम, सेट, लोकेशन में 70 के दशक वाला फील दिया है।

म्यूजिक

अमूमन वेब सीरीज में निर्देशक इन दिनों म्यूजिक को लेकर अधिक सजग नहीं, लेकिन इस सीरीज के कुछ गाने मेरी जुबान पर अब भी चढ़े हुए हैं। खासतौर से फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक कमाल का है।

परफॉर्मेंस

इस सीरीज की सबसे खासियत यह है कि यह किरदारों को मेलोड्रैमेटिक नहीं होने देती है। खासतौर से अमला पॉल ने बिल्कुल सहजता से अपने किरदारों को जिया है। 70 के दशक में एक अभिनेत्री की बॉडी लैंग्वेज को खूबसूरती से हैंडल किया है अमला ने। ताहिर की अभी हाल ही में रिलीज हुई ‘ये काली काली आँखें’ देखिये और फिर उन्हें इस सीरीज में देखिये, उनके अभिनय में आपको वेरिएशन साफ़ नजर आएंगे। ताहिर भसीन ने एक अपने अंदाज़ का सिग्नेचर स्टाइल लिया है बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी में। खासतौर से इमोशनल दृश्यों में वे कमाल लगे हैं।अमृता पुरी का अभिनय औसत है।

क्लाइमेक्स

कई फिल्में और सीरीज इन दिनों अपने क्लाइमेक्स में कमजोर हो जा रही हैं। लेकिन इस सीरीज की खूबी है कि इसका क्लाइमेक्स मुझे इमोशनल करता है और अच्छी बात यह है कि इस कहानी में निर्देशक ने अच्छा क्लोजर दिया है।

अतीत और वर्तमान का ट्रांजिशन अच्छा

कहानी में एक ही परिस्थिति को दो अलग-अलग लोगों के नजरिये से दिखाया गया है और उसमें जो अतीत और वर्तमान का ट्रांजिशन का इस्तेमाल किया गया है, उससे यह कहानी ड्रामेटिक होते हुए भी प्रभावित करती है।

मास्टर स्ट्रोक

महेश भट्ट के गुरु जी कृष्णमूर्ति का वॉचमैन एंगल इस कहानी का मास्टर स्ट्रोक है, अब तक इस एंगल से निर्देशकों ने शायद ही कभी सोचा है, तो यह बिल्कुल नयापन है कहानी में।

जो चीजें और भी बेहतर हो सकती थीं

कलाकारों की जिंदगी की बैक स्टोरी

मुझे सीरीज देख कर ऐसा महसूस हुआ कि कहानी फ़िल्मी दुनिया की थी, सो ऐसी कई बातें है जो जगजाहिर हैं, उन बातों को न भी दिखाया जाता तो फर्क नहीं पड़ता। इसके अलावा आमना सीरीज में केंद्र में है। लेकिन उसकी बैक स्टोरी हमारे सामने आती तो. कहानी देखने में और अधिक मजा आ सकता था। अमृता पुरी के किरदार पर और अधिक मेहनत की गुंजाइश नजर आती है।

कलाकार : ताहिर राज भसीन, अमला पॉल  और अमृता पुरी

निर्देशक : पुष्पराज भारद्वाज

ओटीटी चैनल : वूट सेलेक्ट

मेरी रेटिंग : तीन स्टार

Source: MissMalini

By AlJazeera